हर हिलती हुई झाड़ी मे भूत नही होता !
हो सकता है कोई उसमे अपनी मोहब्बत को 'अन्जाम' दे रहा हो !!
हो सकता है कोई उसमे अपनी मोहब्बत को 'अन्जाम' दे रहा हो !!
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदय राखि कोसलपुर राजा।
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।
अर्थात ;- अयोध्याजी के राजा श्री रामचंद्रजी को मन में रख कर जो सब काम करता है उसके लिये विष भी अमृत बन जाता है, शत्रु मित्र बन जाते हैं, समुद्र गाय के खुर जितना छोटा हो जाता है, अग्नि में शीतलता आ जाती है।
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